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राष्ट्रीय कौशल विकास निधि (एनएसडीएफ)

कौशल विकास के लिए देश के सरकारी तथा गैर-सरकारी सेक्टरों हेतु धन जुटाने के लिए भारत सरकार द्वारा 2009 में राष्ट्रीय कौशल विकास निधि का गठन किया था। यह धन विभिन्न सरकारी स्रोतों तथा अन्य दानदाताओं/अंशदाताओं द्वारा भारतीय कौशलों का विकास और वृद्धि करने के लिए दिया जाता है। इस निधि का संरक्षक भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक न्यास है। यह न्यास निधि स्थापित करने के लिए दान तथा अंशदान को नकद तथा वस्तुओं के रूप में स्वीकार करता है। इस निधि का प्रचालन और प्रबंधन न्यासियों के बोर्ड द्वारा किया जाता है। न्यास का मुख्य कार्यकारी अधिकारी न्यास के दैनिक प्रशासन तथा प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है।

निधि अपने उद्देश्यों को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के माध्यम से पूरा करता है, जो उद्योग द्वारा चलाई जा रही एक ‘लाभ न कमाने वाली कंपनी’ है, जिसकी स्थापना कौशल विकास क्षमता निर्माण और बाजार के मजबूत संबंधों को स्थापित करने के प्रयास के तौर पर की गई है। एनएसडीसी कौशल संबंधी प्रशिक्षण प्रदान करने वाले उद्यमों, कंपनियों और संगठनों के लिए धन जुटाकर कौशल विकास में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है। यह निजी क्षेत्र की पहलों को बढ़ावा देने, सहयोग तथा समन्वय करने के लिए उपयुक्त मॉडलों का विकास भी करती है। 31 मार्च 2020 तक, एनएसडीएफ ने, राष्ट्रीय कौशल प्रमाणन और मौद्रिक पुरस्कार स्कीम (स्टार) और उडान स्कीम (जम्मू एवं कश्मीर उन्मुखी) सहित कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए एनएसडीसी को 4951 करोड़ रुपए जारी किए हैं।

न्यास के लेखों की लेखापरीक्षा कैग के अधीन है तथा इनकी लेखा परीक्षा भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा भी की जाती है। न्यास ने एनएसडीसी द्वारा की जा रही गतिविधियों की निगरानी करने के लिए विस्तारा आईटीसीएल (इंडिया) लिमिटेड को स्वतंत्र निगरानी एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है।

संपर्क:

1. न्यास के अवस्थापक और अध्यक्ष
श्री प्रवीण कुमार, आईएएस,
सचिव,
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय
ईमेल: secy-msde[at]nic[dot]in

2. मुख्य कार्यकारी अधिकारी
सुश्री जुथिका पाटणकर, आईएएस,
अपर सचिव,
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय
ईमेल: juthika.p[at]nic[dot]in