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आईटीआई के उन्नयन के लिए स्कीमें

निम्नलिखित स्कीमों के माध्यम से आईटीआई का उन्नयन करके आईटीआई के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया गया है :

क. 400 सरकारी आईटीआई का उन्नयन- बाहरी सहायता प्राप्त परियोजना (ईएपी) – विश्व बैंक से सहायता-प्राप्त व्यावसायिक प्रशिक्षण सुधार परियोजना (वीटीआईपी):

व्यावसायिक प्रशिक्षण सुधार परियोजना (वीटीआईपी) में 400 सरकारी आईटीआई के उन्नयन की परिकल्पना की गई है। इस परियोजना में 34 राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र भाग ले रहे हैं। औद्योगिक सेक्टर के आधार पर उन्नयन के लिए लगभग 2 से 3.5 करोड़ रूपए आईटीआई को आबंटित किए गए हैं। स्कीम के उद्देश्य में आईटीआई अनुदेशकों के ज्ञान और कौशल में विस्तार करना, 14 केंद्रीय संस्थानों में सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण करना, पाठ्यचर्या विकास, क्षमता निर्माण का सुदृढ़ीकरण करना आदि भी शामिल हैं।

परियोजना के अंतर्गत शुरू किए गए मुख्य संस्थागत सुधार, आईटीआई स्तर पर संस्थान प्रबंधन समिति (आईएमसी) का गठन किया जाना है, जिसका अध्यक्ष उद्योग की तरफ से होगा। इसके वास्तविक घटकों में नए क्लास रूम की स्थापना करना और कार्यशालाएं, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण, उपकरणों, उपस्करों, मशीनरी का आधुनिकीकरण तथा अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना आदि शामिल हैं।

यह परियोजना दिसंबर 2007 में शुरू की गई और इसका समापन सितंबर 2018 को हुआ। अब तक राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों तथा केंद्रीय रूप से वित्त-पोषित संस्थानों को 1812 करोड़ रूपए जारी किए जा चुके हैं, जिसकी तुलना में अब तक लगभग 1754 करोड़ रूपए का उपयोग किया जा चुका है।

ख. पीपीपी माध्यम से 1396 सरकारी आईटीआई का उन्नयन

पीपीपी के माध्यम से 1396 सरकारी आईटीआई उन्नयन स्कीम के अंतर्गत 1227 सरकारी आईटीआई लिए गए हैं और उद्योग भागीदार (आईपी), स्कीम के अंतर्गत लिए गए प्रत्येक आईटीआई के साथ जुड़ा हुआ है। सोसाइटी के रूप में पंजीकृत संस्‍थान प्रबंधन समिति (आईएमसी) प्रत्‍येक आईटीआई में गठित की गई है, जिसकी अध्‍यक्षता उद्योग भागीदार द्वारा की जाती है। प्रति आईटीआई 2.50 करोड़ रूपए का ब्याज रहित ऋण केंद्रीय सरकार द्वारा आईटीआई आईएमसी सोसाइटी को सीधे जारी किया गया है। वित्तीय और शैक्षिक स्वायत्तता आईएमसी सोसाइटी को दी गई है। ब्याज रहित ऋण आईएमसी द्वारा 10 वर्ष के ऋण स्थगन पर देय होगा और उसके बाद समान वार्षिक किस्तों में 20 वर्ष की अवधि में देय होगा। स्कीम के अंतर्गत 31 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को शामिल किया गया है और 11वीं योजना अवधि के दौरान देश भर में 1227 सरकारी आईटीआई को 3067.50 करोड़ रूपए जारी किए गए हैं। सभी राज्य सरकारों के लिए डीजीटी द्वारा भारत सरकार को ऑनलाइन पोर्टल "bharatkosh.gov.in" के माध्यम से ब्याज मुक्त ऋण की अदायगी के लिए पत्र जारी कर दिया गया है।

ग. सरकारी आईटीआई का मॉडल आईटीआई में उन्नयन

इस स्कीम के अंतर्गत किसी राज्य में मौजूदा आईटीआई को मॉडल आईटीआई में उन्नत किया जा रहा है, जो सर्वोत्तम पद्धतियों, सक्षम और उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण देने तथा सतत और प्रभावी उद्योग संबंधी निष्पादन करने वाले संस्थान के रूप में निम्नलिखित तौर पर विकसित किया जाएगा:

  • प्रशिक्षण में अपनी विशेषज्ञता और सर्वोत्तम निष्पादन के रूप में स्थानीय उद्योग के लिए मांग केंद्र बनाकर।
  • स्थानीय उद्योगों के साथ बेहतर संबद्धता करके।
  • उद्योग की विशिष्ट कौशल आवश्यकताएं पूरा करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने हेतु उद्योग के साथ फ्लैक्सी एमओयू पर हस्ताक्षर करके। ऐसे अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा/आकलन एनसीवीटी द्वारा किया जाएगा।
  • असंगठित सेक्टर के कामगारों को प्रशिक्षण देकर आकलन।
  • मौजूदा औद्योगिक श्रमबल को प्रशिक्षण देकर।

प्रत्‍येक आईटीआई के लिए संस्‍थान प्रबंधन समिति (आईएमसी) का गठन किया जाना है, जिसका अध्‍यक्ष उद्योग से होगा। सभी प्रमुख ट्रेड आईएमसी में उद्योग के प्रतिनिधियों द्वारा कवर किए जाने हैं। आईएमसी को इसके कुशल कार्यकरण के लिए शक्तियां प्रदान की जानी हैं।

इस स्कीम का अनुमोदन दिसंबर 2014 में 300 करोड़ रूपए की कुल लागत से किया गया था। स्कीम की कार्यान्वयन अवधि 3 वर्ष की है अर्थात, वित्त-वर्ष 2016-17 तक। इस स्कीम को मार्च 2020 तक जारी रखने के लिए स्‍थायी वित्‍त समिति (एफएससी) द्वारा 09.08.2018 को हुई अपनी बैठक में 300 करोड़ रूपए की कुल लागत से अनुमोदित किया गया था। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 27 राज्‍यों के 29 आईटीआई की पहचान की गई है और राज्‍य के हिस्‍से सहित 245.30 करोड़ रूपए (केंद्रीय भागीदारी 119.46 करोड़ रूपए (राज्य भागीदारी सहित) की राशि जारी की गई है।